25 लाख रुपये में महिला ने खड़ी करदी करोड़ो की कंपनी,ममाअर्थ की मालकिन बन देश विदेश में बनाये कस्टमर

दोस्तों यदि आप खुद का बिजनेस खड़ा करना चाहते हो तो बिजनेस की शुरुवात किस तरह से करनी चाहिए इसके बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए इसीलिए किसी भी चीज को मार्केट में लाँच करने से पहले  उसकी सही तरीके से जाँच कर लेनी चाहिए और उस को लोगो के घरो तक पहुचाने का सफर बेहद ही कठिन रास्तों से होकर गुजरता है इसीलिए आज हम जिस प्रोडक्ट की सफलता की कहानी के बारे में बताने वाले है उसको आपने कभी न कभी इस्तमाल तो जरुर किया होगा इसीलिए अगर आप उस प्रोडक्ट को इस्तमाल नही किया है तो आपके घर में किसी सदस्य ने उसको जरुर इस्तमाल किया होगा या करता है जी हा आज हम बात कर रहे है एक ऐसी महिला की जिन्होंने अपने दम पर 25 लाख रुपये का खड़ा किया खतरनाक बिजनेस और आज सालाना कमाती है करोडो रुपये. जानने के लिए बने रहे लेख के अंत तक.

बच्चे को सूट नही किया कोई प्रोडक्ट तो महिला ने खोली खुद की कंपनी, आज 100 करोड़ से ज्यादा है कमाई

मामाअर्थ ये नाम आपने कई यूट्यूबर्स के मुंह से सुना ही होगा. आपने कई यूट्यूबर्स को इसका विज्ञापन या प्रचार करते भी देखा होगा. आज हर कोई इस ब्रांड को जानता है और लोग इसके उत्पादों को खरीद भी रहे हैं इसीलिए आज हम इसकी सफल के बारे में बताने जा रहे है कि मामाअर्थ की शुरुआत गजल अलघ ने करी थी. 2 सितंबर 1988 को हरियाणा के गुरुग्राम में गजल अलघ का जन्म हुआ था. गजल अलघ की ज़िंदगी का काफी समय चंडीगढ़ में बीता है. वे वहीं पले-बढ़े. गजल अलघ ने अपनी स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ से ही करी है. इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से बीसीए में ग्रेजुएशन किया . और बाद उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया इसके बाद उन्हें नौकरी मिल गई.

इस तरह हुई थी मामाअर्थ की शुरुआत :-

जब गजल अलघ पहली बार माँ बनीं तब उनके बेटे अगस्त्य को भारत में कोई बेबी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट सूट नहीं कर रहा था. जिससे गजल अलघ काफी खफा थी. गजल अलघ ने विदेश से कुछ उत्पाद मंगवाए जो उनके बेटे को सूट कर गया. गजल अलघ के दिमाग में यह विचार आया कि जिस तरह उनके बेटे को ये बेबी प्रोडक्ट सूट नहीं कर रहा था, उसी तरह भारत में कई बच्चों के साथ ऐसा ही हो रहा होगा. और इस पर शोध करना शुरू कर दिया. गजल अलघ ने सबसे पहले देखा कि विदेशी उत्पादों में ऐसी कौन-सी चीज़ें इस्तेमाल की जाती हैं, जिससे बच्चों को नुकसान नहीं होता और भारत में बने उत्पादों में कौन सी ऐसी चीजें इस्तेमाल होती हैं जो नुकसान पहुंचाती हैं.

गजल अलघ अपने शोध में सफल रही और यह पता लगाने में सक्षम रही कि ये उत्पाद उनके बेटे और अन्य बच्चों के लिए उपयुक्त क्यों नहीं हैं. बस इसके बाद गजल अलघ मामाअर्थ की शुरुआत करने में जुट गई.मामाअर्थ की शुरुआत वर्ष 2015 में गजल अलघ और उनके पति वरुण ने करी थी. इसे शुरू करने से पहले गजल अलघ ने लगभग 700 महिलाओं को उनके बच्चों पर इस प्रोडक्ट का परीक्षण करवाया.उन सभी महिलाओं के रिव्यू लिए और फिर उत्पाद को बाजार में लॉन्च कर दिया. मार्केट में लॉन्च करने के बाद उन्होंने अपने प्रोडक्ट की खूब ब्रांडिंग की लेकिन ब्रांडिंग का तरीका बिलकुल अलग रखा. आज के समय में मामाअर्थ एक बड़ी कंपनी बन चुकी है.

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