आखिर क्यूँ ऋषि अगस्त्य ने की थी अपनी ही बेटी के साथ शादी, जानिये कारण

दोस्तों इतिहास से जुडी कुछ घटनाये सुनने और देखने को मिलती है जो काफी सोच में डालने वाली होती है  जैसे कि कोई पिता अपनी ही बेटी के शादी कर सकता है ये बात सभी लोगो को काफी ज्यादा परेशान करने वाली है लेकिन यह बात सच है आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भगवान शिव के भक्त ऋषि अगस्त्य को अपनी ही बेटी के साथ शादी करनी पड़ी थी ऐसा सुनने में आया है इसीलिए आज हम अपने आर्टिकल के जरिये सभी लोगो को बताना चाहते है कि किस कारण से उनको अपनी ही बेटी के साथ शादी करनी पड़ी जानने के लिए बने रहे पोस्ट के अंत तक.

कौन थे ऋषि अगस्त्य?:-  ऐसा कहा जाता है ऋषि अगस्त्य राजा दशरथ के राजगुरु थे. उन्होंने अपने तपस्या काल में कई मंत्रों की शक्ति को देखा था. इनकी गणना सप्तर्षियों में की जाती है. महर्षि अगस्त्य को मंत्र दृष्टा ऋषि बोला जाता है, क्योंकि ऋग्वेद के अनेक मंत्र इनके द्वारा दृष् हैं. जी हाँ और जब देवासुर संग्राम हो रहा था, तब सभी दानव हारने के बाद समुंद्र के तलों में जाकर छुप गए थे. तभी भगवान शिव जी की आज्ञा पर अगस्त्य ऋषि ने ही सातों समुंद्रों का जल पी लिया था उसके बाद सभी राक्षसों का संहार हुआ था.

वहीं एक दिन अगस्त्य ने अपने तपोबल से सर्वगुण सम्पन्न नवजात कन्या का निर्माण किया. इस कन्या का नाम लोपामुद्रा रखा गया. लेकिन जब उन्हें यह पता चला की विदर्भ का राजा संतान प्राप्ति के लिए तप कर रहा है तो उन्होंने अपनी ही बेटी को उसे गोद दे दिया. उस दौरान जब उनकी बेटी जवान हुई तब उसी कन्या से शादी करने के लिए ऋषि अगस्त्य ने राजा से उसका हाथ मांग लिया और राजा भी इस शादी के लिए इंकार नहीं कर पाए. क्योंकि राजा यह जानते थे कि यदि वे ऐसा करने से मना कर देते तो ऋषि अगस्त्य उनको अपने घातक श्राप से भस्म कर देतें. इसलिए राजा ने ऋषि अगस्त्य से इनकार नहीं किया था.

उसके बाद ऋषि अगस्त्य ने अपनी पत्नी लोपामुद्रा (जो उनकी बेटी ही थी) की पूर्ण सहमति से विवाह के बाद दो संतानों को जन्म दिया था. तब ऋषि अगस्त्य ने अपनी पत्नी लोपामुद्रा से दो संतानों को जन्म भी दिया. जिसमें से एक संतान का नाम भृंगी ऋषि था, जो शिव के परम भक्त थे और वहीं दूसरी संतान का नाम अचुता था. उनकी विवाह के लिए देवताओं ने ऐसा बोला था कि उस समय धरती के मनुष्य आत्मा को देखते थे ना की रिश्तों की मर्यादा को.

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