24 साल तक पुलिस को नज़रो से छिपा रहा, अब हुआ गिरफ्तार ,कौन था फूलन देवी का अपहरण करने वाला छेदा सिंह

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दे कि औरैया व अयाना पुलिस ने लालाराम गिरोह के मुख्य सदस्य, 24 वर्षो से फरार 50 हजार रूपए के घोषित ईनामियां मोस्टवांटेड छेदा सिंह उर्फ छिद्दा निवासी भासौन को उसके घर से गिरफ्तार किया है। इस डाकू पर साल 2015 में 50000 का इनाम घोषित किया गया था। गिरफ्तार डाकू के पास से बृजमोहन दास पुत्र राम बालक दास के नाम से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड तथा राशन कार्ड भी बरामद हुए है। डाकू छेदा सिंह ने लालाराम गैंग के बारे में जानने के लिए पोस्ट के अंत तक बने रहिये.

दरअसल उत्तर प्रदेश के इटावा जिले मे   27 जून को इटावा जेल में जिसके बाद छेदा सिंह को सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती करा दिया गया दाखिल किए जाने के वक्त छेदा सिंह की तबियत बिगड़ गई, टीवी रोग से मौत के शिकार बने , जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई इटावा जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डाॅ रामधनी ने बताया कि छेदा सिंह की मौत आज शाम सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में टीवी रोग के इलाज के दौरान हो गई है. छेदा सिंह लालाराम गैंग खत्म होने के बाद धीरे-धीरे गैंग समाप्त होने लगा तो नाम और हुलिया बदलकर चित्रकूट में रहने लगा.

उसने आप को कागजों मे मार दिया है. मगर परिवार के दावों पर पुलिस को यकीन नहीं था. 24 साल बाद साधु बनकर रह रहे छेदा सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था चंबल में जब डकैतों के खिलाफ अभियान चल रहा था, तब छेदा सिंह वहां से भाग निकला था. वह मध्यप्रदेश के सतना में जाकर रहने लगा था. यहां वह साधु बन गया था.

चित्रकूट में वह पहले काशी घाट में रहा और अब दस सालों से जानकी कुंड के आराधना आश्रम में सेवादार के रूप में काम करने लगा. छेदा सिंह के खिलाफ विभिन्न थानों में 21 मुकदमे दर्ज थे. छेदा सिंह का नाम 1981 में बेहमई कांड से पहले छेदा सिंह पर चंबल की खूंखार महिला डाकू फूलन देवी का अपहरण करने का आरोप था और इसके ऊपर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था.

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