श्री कृष्ण से जुड़ी खास बाते, कब हुई उनकी शादी, कितने थे बच्चे और किस उम्र में कैसे हुई मृत्यु

दोस्तों भगवान श्री कृष्ण का जन्म त्रेतायुग में कारगर में हुआ था है हिन्दू धर्म की मान्यताओ के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु के 8वें अवतार के रूप में पूजा जाता है. और इनके बारे में कई सारी कहानियाँ भी पढ़ी होगी. कथाओ में भी इनके बारे में काफी वर्णन होता है .आज देश भर में लोग इनके जन्म को जन्माष्टमी के रूप में मानते है और लोग इनके जन्म को लेकर काफी बे-चैन रहते है लेकिन कुछ लोग इनके जन्म के समय हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयकारा भी लगाते है लेकिन आज हम इनके जीवन से सम्बंधित कुछ ऐसी घटनाये जिसको आप सभी लोग नही जानते होगे कि कब और कैसे भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु हुई, क्या उम्र थी, कितने बच्चे थे इन सभी सवालों के जवाब हम अपने आर्टिकल के जरिये इन सभी सवालों के जवाब बताना चाहते है जानने के लिए लेख के अंत तक बने रहे.

 

दोस्तों अक्सर हम कृष्ण को मक्खन चोर के रूप में या महाभारत में अर्जुन के सारथी के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने युद्ध के बीच उन्हें गीता का ज्ञान दिया था. लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु जरा नामक बहेलिए के तीर से हुई थी. कृष्ण पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे, तभी बहेलिए ने हिरण समझकर दूर से उनपर तीर चला लिया, जो उनके पैरों में जाकर लगा. जिससे उनकी मृत्यु हो गई.

भगवान कृष्ण का जन्म 3112 ईसा पूर्व में हुआ था. मान्यता है कि उनकी उम्र 125 साल 8 महीने और 7 दिन थी. ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की सिर्फ 8 पत्नियां थी जिनके नाम रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा था. आठ पत्नियों से हर एक से भगवान कृष्ण को 10 बेटे हुए. यानि कुल मिलाकर भगवान के 80 पुत्र थे. इन 08 रानियों को अष्टा भार्या भी कहा जाता था. और ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवी राधा से इसलिए विवाह नहीं किया ताकि मनुष्यों को आंतरिक प्रेम के बारे मे सिखाया जा सके.

वेदों के अनुसार, भगवान कृष्ण श्याम वर्ण के थे. ओडिशा में पारंपरिक पट्टा चित्र (कपड़ा कला) में भी भगवान कृष्ण और विष्णु को हमेशा सांवले रंग का दिखाया गया है. इसी वजह से उन्हें सांवला सुंदर भी कहा जाता है.श्रीकृष्ण को कान्हा, कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश या द्वारकाधीश और वासुदेव आदि नामों से जाना जाता है. श्रीकृष्ण भगवान शिव ने बांसुरी दी और उन्होंने ही बांसुरी बजाना भी सिखाया.

भगवान कृष्ण का जन्म 27 जुलाई, 3112 ईसा पूर्व आधी रात के आसपास हुआ था. उस रात चंद्रमा का आठवां चरण था जिसे अष्टमी तिथि के रूप में जाना जाता है. भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) महीने के अंधेरे पखवाड़े की अष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के जन्म के जश्न के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है.

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