विजय देवरकोंडा का ओवर कॉन्फिडेंस हुआ चकना चूर ,फिल्म में अनन्या पांडे साबित हुई सबसे कमजोर कड़ी

मित्रो बालीवुड में बहुत सी ऐसी हस्तिया है जिन्होंने अपनी एक्टिंग और अदाकारी के दम पर लोगो के दिलो में खास जगह बनायीं है इसीप्रकार से साउथ इंडस्ट्री के अभिनेता अभी हाल ही में आई फिल्म लाइगर को लेकर दोनों लोग काफी ज्यादा उत्सुक थे कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खूब धमाल मचायेगी और इससे बहुत अच्छी कमाई होगी लेकिन इन दिनों कुछ ऐसा सुनने में आ रही है कि इस मूवी को देखना लोग पसंद नही कर रहे  है अगर आप सभी लोग इस मूवी के बारे में विस्तार से जानना चाहते हो तो पोस्ट के अंत तक बने रहे.

तुरुप का पत्ता शुरू में ही खोलने का मलाल :-

फिल्म ‘लाइगर’ कहने को एक अंडरडॉग की कहानी है। लेकिन, इसकी असल काबिलियत यानी कि दर्जनों लोगों से एक साथ भिड़ने की उसकी कूवत पुरी जगन्नाथ फिल्म की शुरुआत में ही दिखा देते हैं। इसके बाद उसकी हर फाइट बेअसर होती जाती है। फिल्म का तुरुप का पत्ता पहले ही खोल देने के बाद फिल्म का हर पत्ता दर्शकों को पहले से पता रहता है। कहानी मुंबई में चाय की दुकान चलाने वाले मां बेटे की है। मां ने बेटे को इसी उम्मीद के साथ पाला है कि जो खिताब उसका पति नहीं हासिल कर पाया, उसे एक दिन उसका बेटा हासिल करेगा। लेकिन, फिल्म के क्लाइमेक्स में बेटा ही इस किस्से को ‘फेक’ बता देता है। मिक्स मार्शल आर्ट्स की कोचिंग के पहले दिन कोच कहता है, ‘मुझे तुम्हारा कॉन्फिडेंस पसंद आया, लेकिन इसके पीछे जो टशन है, उसे थोड़ा कम करो।’ पुरी जगन्नाथ को यही काम फिल्म के साथ करने चाहिए था।

सहानुभूति बटोरने का बिखरा सा सवाल :-

लड़ना, भिड़ना और जीतना एक इंसानी जज्बा है। इस जज्बे की कद्र जब भी कहानी में कायदे से की जाती है। फिल्म हिट होती है। फिल्म के निर्माता करण जौहर ने अपने पिता यश जौहर को याद करते हुए अपने पिछले इंटरव्यू में मुझसे कहा था, ‘ए हिट फिल्म इज ए गुड फिल्म’। और, ‘लाइगर’ एक गुड फिल्म नहीं है। ये दर्शकों के धैर्य का इम्तिहान लेती फिल्म है। कहानी ठीक से बघारी भी नहीं गई होती है कि पुरी जगन्नाथ इसमें गानों का तड़का लगाना शुरू कर देते हैं। फिल्म यहीं से लंगड़ी हो जाती है। हीरो के लिए दर्शकों की सहानुभूति जुटाने को वह उसे हकला भी बनाते हैं लेकिन यहां उसकी हकलाहट नकली लगती है। हकलाहट के मनोविज्ञान को ढंग से समझ कर उसे फिल्म के नायक का हथियार भी बनाया जा सकता था और इस हकलाहट की वजह अगर अतीत की कोई घटना होती तो मामला बेहतर जम सकता था।

भारी पड़ा जरूरत से ज्यादा अपनों का ख्याल :-

बतौर लेखक विफल रहने के साथ साथ पुरी जगन्नाथ फिल्म ‘लाइगर’ में बतौर निर्देशक भी पूरी तरह विफल रहे हैं। अपनी कंपनी के सीईओ विषु रेड्डी यानी विष को उन्होंने बतौर विलेन हिंदी सिनेमा में पेश किया है। माइक टायसन भी क्लाइमेक्स में आते हैं और इसे खराब करने के सिवा कुछ नहीं करते हैं। करण जौहर की खासमखास अनन्या पांडे फिल्म की हीरोइन हैं। अपनों को ही चमकाते रहने की इस आदत से फिल्मकारों को अब बाज आने की जरूरत है। न तो विष इस फिल्म का कुछ मूल्यवर्धन करते हैं और न अनन्या पांडे। अनन्या पांडे देखा जाए तो फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं। अभिनय उनसे होता नहीं है और जब भी वह परदे पर आती हैं, दर्शकों को उकताहट सी होने लगती है। रूप, लावण्य और सौंदर्य में भी वह सिनेमा की हीरोइन सी नहीं जंचतीं। उनकी विजय देवरकोंडा के साथ रची गई प्रेम कहानी में भी मोहब्बत का कहीं कोई रंग नहीं दिखता। सब कुछ बहुत नकली सा दिखता है।

नहीं चला ‘अर्जुन रेड्डी’ का कमाल :-

अपनी ही फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ को अपनी शोहरत का एहसान न मानने वाले विजय देवरकोंडा यहां ‘टशन’ के शिकार अभिनेता दिखते हैं। फिल्म की हिंदी रीमेक ‘कबीर सिंह’ का जिक्र भी फिल्म में आता है। विजय की की देहयष्टि और उनकी शख्सियत फिल्म में आकर्षक लगती है लेकिन उनका अभिनय एक महत्वाकांक्षी मां के बेटे जैसा नहीं लगता। मेहनत उनकी काबिले तारीफ है लेकिन इस मेहनत का जो नतीजा परदे पर दिखना चाहिए था, उस पर विजय का ये ‘टशन’ ही पानी फेरता है। उनकी मां बनी राम्या कृष्णन अब भी ‘बाहुबली’ के हैंगओवर में हैं। आंखें निकालकर संवाद बोलना या फिर कमर झुकाकर कैमरे के सामने चीखना, हर बार दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकता है। काशी की पृष्ठभूमि की कोई मां अपने बेटे को किसी भी हालत में ‘साले’ तो नहीं ही बोलती है। एक मजबूत मां, एक सुंदर सी प्रेमिका और आवारगी में भटकता नायक, हिंदी सिनेमा का यश चोपड़ा से लेकर मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा तक की फिल्मों का हिट फॉर्मूला रहा है। पुरी जगन्नाथ ने इस फॉर्मूले को भी तार तार कर दिया।

दोस्तों इस वीडियो के आधार पर हम कह सकते है कि इस फिल्म को लोगो के दवारा क्यों नही पसंद की गयी है क्योकि लाइगर फिल्म के गाने और एक्टिंग इसके पहले आई फिल्म पुरी जगन्नाथ से सेम है इसके आगे जानने के लिए पोस्ट के अंत तक बने रहे धन्यवाद.

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