टीचर को कार में ज़िन्दगी गुजारते देख भावुक हुआ स्टूडेंट, पल में बदल दी गुरु की ज़िन्दगी

दोस्तों हर सौ साल के बाद कुछ ऐसे वायरस आते है जिसका असर सारी दुनिया में देखने को मिलता है वायरस का सबसे ज्यादा असर पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है इसीप्रकार से कोई आर्थिक तंगी से परेशान है तो कोई बेरोजगार हो गया है जैसे-तैसे एक बार फिर उसकी जीवन शैली पटरी पर आ गयी है जिससे दोबारा काम शुरू करके जीवनयापन करना कठिन है इसीप्रकार से एक टीचर को भी महा-मारी के दौ-रान काफी ज्यादा आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा इतना ही नही बल्कि उनकी जो आय का जरिया था वो भी उनके हाथ से निकल गया था जिसके कारण कार में ही दिन गुजरने के लिए मजबूर हो फिर ऐसा उनके पुराने छात्र ने किया कि उनकी पूरी जिन्दगी ही बदल गयी जानने के लिए बने रहे लेख के अंत तक.

दरअसल ,कैलिफोर्निया के जोस नाम के टीचर पर भी इसकी दोहरी मार पड़ी है. उनके पास आय का कोई स्त्रोत नहीं बचा, हालत ये हो गई कि वो अपने कार में ही रहने को मजबूर हो गए. उनके पास जो भी पैसे होते थे वो अपने परिवार के खर्चे के लिए दे देते थे. दरअसल, कोरोना के कारण जब से स्कूल बंद हुए तब से जोस पर पैसों का बहुत अभाव हो गया. वैसे तो गुरु को बच्चों का जीवन बनाने वाला माना जाता है लेकिन जोस की आर्थिक तंगी से गुजर रही जिंदगी को पटरी पर लाने का काम उनके एक छात्र स्टीवन ने किया. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टीवन ने कहा कि वो जब भी घर से बाहर काम के लिए निकलता तो अपने टीचर को दिन की शुरूआत कार में से ही करते देखा. इसके बाद स्टीवन ने सोचा कि वो अपने गुरु के लिए कुछ तो ऐसा करेंगे कि जिससे उनकी आर्थिक तंगी दूर हो. इसके बाद स्टीवन ने एक फंड रेजिंग एकाउंट बनाया और उसमें पैसे इकट्ठा करना शुरू किया.

स्टीवन का कहना है कि हमारा लक्ष्य 5 हज़ार डॉलर इकट्ठा करना था लेकिन हमने लक्ष्य से 6 गुना ज्यादा पैसा इकट्ठा किया. इसके बाद गुरुवार को गुरु जोस का 77वां जन्मदिन आया तो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनको इस तरह का सरप्राइज मिलेगा. स्टीवन और बाकी दोस्तों ने टीचर को हैप्पी बर्थ डे विश किया और उनके जन्मदिन के तोहफे में उनके हाथ मे 27 हजार डॉलर का चेक थमा दिया. जोस ने कहा कि मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा, मेरे लिए यह चौंकाने वाला था. कभी मैंने सरप्राइज की उम्मीद नहीं खो थी. वहीं अपने टीचर की जिंदगी को खुशियों से भरने वाले स्टीवन ने कहा कि उस व्यक्ति की मदद करना किसी सम्मान से कम नहीं है, जो बहुत से बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए नि:स्वार्थ भाव से काम करता हो.

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