बंद होने की कगार पर थी रॉयल एनफील्ड की बाइक्स बनाने वाली कंपनी,इस शक्स की मेहनत ने बनाया उसे 8000 करोड़ का मालिक

मित्रों इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा होगा जो आशाहीन हो, जहां तक मेरा मानना है कि इंसान ख्वाहिशों का पुतला है क्योंकि उसकी कभी भी ख्वाहिशें पूरी नही होती है कारण यह है की उसकी ख्वाहिशे एक के बाद एक बढ़ती रहती है। उन्हें पूरा करने के लिये वे दिन-रात परिश्रम करते है, और अत्यधिक परिश्रम कर पैसा कमाना चाहते है। उस पैसे से अपनी हर ख्वाहिश पूरी करना चाहते है। इसी क्रम में आज हम एक ऐसे शक्स के संबंध में बताने वाले है जो बन्द पड़ी कंपनी को चालू कर अपनी मेहनत और लगन के बदौलत आज बन गया 8 हजार करोड़ की कंपनी का मालिक।

दरअसल रॉयल एनफील्ड की बाइक्स को आज के समय में काफी पसंद किया जा रहा है, एक समय था जब बुलेट की पैरेंट कंपनी इसे बंद करना चाहती थी, पर इसे फिर से शान की सवारी बनाने के लिए एक आदमी ने पहल की और ऐसा करके दिखाया, आज रॉयल एनफील्ड की बाइक्स लोगों के दिलों पर राज कर रही हैं, पहले ब्रिटिश कंपनी रॉयल एनफील्ड ‘बुलेट’ को तैयार करती थी, वर्ष 1971 में ब्रिटिश कंपनी के बंद हो जाने के बाद भारतीय निर्माताओं ने ‘बुलेट’ के अधिकार खरीद लिए, लेकिन, 1970 से 1980 के बीच रॉयल एनफील्ड के मैनेजमेंट ने ऐसे कई फैसले लिए, जिससे कंपनी भारी बोझ तले दब गई, वहीं 1990 में सीडी 100 के आने से रॉयल एनफील्ड को भी झटका लगा, बुलेट लगभग बाजार से बाहर हो चुकी थी, 1994 में, आयशर ने बुलेट में विश्वास व्यक्त करते हुए कंपनी खरीद ली, आयशर ग्रुप को साल 2000 में काफी घाटा हुआ, समूह के वरिष्ठ अधिकारियों की राय में रॉयल एनफील्ड को बेचने या बंद करने का यह सही निर्णय था, समूह के इस विभाग को 20 करोड़ का नुकसान हुआ था।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि विक्रम लाल के बेटे सिद्धार्थ लाल ने संभाग को लाभ में लाने के लिए 24 महीने का समय मांगा, सिद्धार्थ संभाग के मुखिया बने और सबसे पहले उन्होंने जयपुर में नया एनफील्ड प्लांट को पूरी तरह से बंद कर दिया, फिर डीलर छूट को भी समाप्त कर दिया, जिससे कंपनी पर हर महीने 80 लाख रुपये का बोझ आ रहा था। सिद्धार्थ ने फैसला किया कि मौजूदा ब्रांड को मजबूत करने की कोशिश करना किसी अन्य बाजार या खंड में प्रवेश करने से बेहतर है, सिद्धार्थ ने 18-35 साल के युवाओं को टारगेट करते हुए साल 2001 में 350 सीसी की बुलेट इलेक्ट्रा लॉन्च की थी, इसे कई रंगों और इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन के साथ लॉन्च किया गया था, सिद्धार्थ ने रिटेल आउटलेट और मार्केटिंग पर बहुत ही ज्यादा ध्यान दिया था,

उन्होंने ऐसे आउटलेट शुरू करे जहां पर बाइक खरीदारों को बेहतर अनुभव दिया जा सके, रॉयल एनफील्ड बाइकर्स के लिए अलग-अलग राइड्स भी आयोजित करती है , कंपनी ने 2012 में 81,464 मोटरसाइकिलें बेचीं, जबकि 2013 के दौरान 1,23,018 यानी 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई, रॉयल एनफील्ड ने 2018 में 354,740 यूनिट्स की बिक्री की है, यह पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा थी, और आज के समय में इन बाइक्स को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.