CRPF जवान के सुसाइड नोट से हुआ बड़ा खुलासा,अफसरों की मुश्किलें बढ़ी, दुखी परिवार ने शव लेने से किया इनकार

दोस्तो आपने बहुत से आ त्म ह त्या के मामले सुने होंगे । जिसकी गुत्थी पुलिस आसानी से सुलझा लेती है l लेकिन आज हम आपको आ त्म ह त्या के ऐसे मामले के बारे में बताने वाले है जिसने सभी को असमंजस में डाल दिया है । ये मामला एक जवान की आ त्म ह त्या का है जिसमे जवान द्वारा लिखा एक सुसाइड नोट मिला है जिसके कई बड़े खुलासे किए गए है जिसके बाद से सीआरपीएफ के अफसरों को मुश्किल बढ़ गई है ।क्या है पूरा मामला जानने के लिए खबर को अंत तक जरूर पढ़े।

राजस्थान के जोधपुर जिले में सोमवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल  के जवान द्वारा सरकारी इंसास राइफल से गोली मारकर आत्महत्या कर लेने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. जवान की विधवा ने पुलिस को 7 पेज का सुसाइड नोट सौंपा है. सुसाइड नोट में जवान ने जोधपुर स्थित महकमे के ट्रेनिंग कैंप के कई अफसर-कर्मचारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. उधर पोस्टमॉर्टम कराने के बाद पुलिस ने जब सिपाही का शव परिजनों के हवाले करने की कोशिश की. तब पीड़ित परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया. पीड़ित के पिता ने पुलिस से कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके पुलिस जांच शुरू करे. उन्होंने सीआरपीएफ को अपना जीवित बेटा सौंपा था. अब महकमे की कारगुजारियों के चलते आत्महत्या कर चुके बेटे की लाश लेकर वे क्या करेंगे?

परिवार वालों के इस सख्त और विरोधी रवैये के चलते जोधपुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, दोनों ही महकमे असमंजस सी हालत में है. जबकि दूसरी ओर पीड़ित परिवार किसी भी कीमत पर अपनी मांगों से पांव पीछे हटाने को मंगलवार दोपहर तक राजी दिखाई नहीं पड़ रहा था. हालांकि मामले को किसी तरह रफा-दफा करने में जुटी पुलिस पीड़ित परिवार के हवाले किसी तरह से, जवान नरेश जाट का शव करने की ही जुगत तलाशने में जुटी दिखाई दे रही थी. ताकि शव का अंतिम संस्कार होने के बाद धीरे-धीरे बात अपने आप ही शांत होती चली जाएगी. महकमे की ही इंसास राइफल से आत्महत्या करने वाले जवान द्वारा पत्नी को भेजे गए 7 पेज के सुसाइड नोट में, ज्यादातर महकमे के ही अफसरों को कटघरे में खड़ा किया गया है. सुसाइड नोट में साफ-साफ लिखा है कि कैसे ट्रेनिंग सेंटर में तैनात सीआरपीएफ के DIG स्तर का एक अफसर, उसका दिन-रात उत्पीड़न कर रहा था.

CRPF जवान ने खुद को मारी गोली

लोकल पुलिस और पीड़ित परिजनों की मानें तो 7 पेज के सुसाइड नोट में मौत को गले लगाने से पहले जवान नरेश जाट ने काफी कुछ बयान किया है. सुसाइड नोट में कई सनसनीखेज आरोप जवान ने जोधपुर स्थित सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर के अफसरों पर मढ़े हैं. इनमें से काफी आरोपों में सत्यता भी झलक रही है. हालांकि दूसरी ओर सुसाइड नोट के सामने आने के बाद से अब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल महकमे में हड़कंप मचा है. क्योंकि जवान के सुसाइड नोट में दर्ज आरोपों को सिरे से खारिज कर देना आसान नहीं है. अगर पुलिस ने ईमानदारी से तफ्तीश पूरी करके मामला कोर्ट में दाखिल कर दिया, तो यह पुलिसिया तफ्तीश कोर्ट में, आरोपी सीआरपीएफ अफसरों के गले की फांस भी बन सकती है.

सुसाइड़ नोट की मदद से हो सकता है खुलासा?

इतना ही नहीं कि जवान ने सिर्फ लिखित में ही सुसाइड नोट छोड़ा है. खुद को गोली मारकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने जा रहे जवान ने, बाकायदा अपने साथ महकमे द्वारा किए जा रहे दुर्व्यहार को लेकर वीडियो भी बनाकर छोड़ा है. मतलब अगर पुलिस सुसाइड नोट में लीपापोती करेगी भी तो फिर, वीडियो को झुठला पाना मुश्किल होगा. वीडियो और सुसाइड नोट से साफ होता है कि किस हद तक जोधपुर सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर का डीआईजी स्तर का एक नामजद अफसर (सुसाइड नोट में नामजद), जवान का मानसिक उत्पीड़न कर रहा था. चूंकि गले में फंदा महकमे के फंस चुका है. लिहाजा ऐसे में अब सीआरपीएफ डिपार्टमेंट भी अपनी खाल बचाने में जुटा है. इतनी बड़ी और सनसनीखेज घटना को लेकर अब तक हर बयान, पीड़ित परिवार या फिर स्थानीय पुलिस ही दे रही है. जबकि सीआरपीएफ महकमा चुप्पी साधे हुए है.

इंसास राइफल इशू करने CRPF ने जांच-पड़ताल की शुरू

सीआरपीएफ की चुप्पी से जाहिर है कि कहीं न कहीं जवान अपनी जगह सही था. गलती प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जोधपुर सेंटर में तैनात उन्ही चंद अफसरों की रही है, जिन पर आरोप लगाकर एक जवान अपनी जान देकर, पूरे परिवार को तबाह करने जैसा घातक कदम उठाने को मजबूर हो गया. पता चला है कि जिस इंसास राइफल का वारदात में इस्तेमाल किया गया वो भी मारे जा चुके जवान नरेश जाट के नाम पर इशू नहीं हुई थी. जवान ने वो राइफल ट्रेनिंग सेंटर में ही तैनात दूसरे नरेश नाम के जवान के नाम से मंजूर करवाई थी. इस मामले की जांच सीआरपीएफ ने शुरू कर दी है कि, आखिर नरेश जाट के लिए किसी दूसरे नरेश नाम के जवान के नाम पर इंसास राइफल कैसे हैंडओवर कर दी गई? इस जांच में भी जोधपुर सीआरपीएफ सेंटर के कई कर्मचारियों के फंसने की पूरी-पूरी संभावना है.

FIR दर्ज करने की जिद पर अड़े परिजन

सुसाइड करने वाले जवान के सुसाइड नोट और वीडियो इस बात की भी तस्दीक करने के लिए काफी हैं कि, सेंटर में उसका न केवल डीआईजी स्तर का अधिकारी, वरन् अन्य कर्मचारी भी मानसिक उत्पीड़न कर रहे थे. घटना के बाद से ही जोधपुर सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर की चुप्पी और भी तमाम सवालों को खड़ा करने के लिए काफी है. उधर पीडि़त परिवार का कहना है कि पुलिस और सीआरपीएफ दोनो ही फोर्स हैं. लिहाजा ऐसे में पुलिस भी अब सीआरपीएफ के आरोपी डीआईजी और उसके अन्य कर्मचारियों को बचाने में ही जुटी है. परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस ने सुसाइड नोट और वीडियो में दर्ज सबूतों के आधार पर जांच करके, आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजने में कोताही बरती तो वे, मामले को अपने स्तर से सीधे कोर्ट में लेकर जाएंगे. उस इस पूरे मामले में करवड़ थाना प्रभारी कैलाश दान चारण ने कहा कि, “शव का पोस्टमॉर्टम डॉक्टरों के पैनल से करवा दिया गया है. शव को परिजनों के हवाले किया जा रहा था. उन्होंने फिलहाल शव लेने से इनकार कर दिया है. परिजन मुकदमा दर्ज करने की जिद पर अड़े हैं. “

Leave a comment

Your email address will not be published.