साक्षी मलिक ने सेकेंड्स में पलटी बाजी, हार के मुंह से निकल जीता गोल्ड

दोस्तो हमारे देश में बहुत से हौनहार एथलीट है जो दुनिया भर में देश का और अपने माता पिता का नाम रोशन करते है । ऐसे एथलीट , खिलाड़ियों पर देश को गर्व है ।आपको बता दे बर्मिंघम में खेले जा रहे खेलो में भारत की बेटी ने देश का नाम रोशन कर दिया है और एक सैकंड में बाजी पलट कर गोल्ड मेडल भारत के नाम कर दिया ।कौन है वो भारत की बेटी जिसने विदेश में जाकर अपने हुनर का ऐसा प्रदर्शन दिया कि पूरा भारत फुला नही समा रहा ।जानने के लिए खबर को अंत तक जरूर पढ़े

ये साक्षी का राष्टमंडल खेलों में पहला गोल्ड मेडल है. इससे पहले वे 2014 में रजत और 2018 में कांस्य पदक जीत चुकी हैं.

साक्षी मलिक ने बर्मिंघम में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों में शुक्रवार को महिलाओं के 62 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. साक्षी ने फाइनल में कनाडा की एना गोंजालेज को मात दी. ये साक्षी का राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण पदक है. ग्लास्गो 2014 में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में साक्षी ने रजत जीता था. 2018 में गोल्ड कोस्ट में साक्षी ने कांस्य जीता था.

साक्षी ने अच्छी शुरुआत की लेकिन थोड़ी सी ढीली पड़ गई जिसका फायदा कनाडा की खिलाड़ी ने लिया और साक्षी को टेकडाउन कर दो अंक लिए. यहां साक्षी अपने ही दांव में उलझ गईं और अंक दे बैठीं. कुछ देर बाद साक्षी फिर गोंजालेज के पेंच में फंस गई और फिर टेकडाउन से दो अंक गंवा बैठीं. पहला राउंड कनाडाई खिलाड़ी के नाम रहा है और वह 4-0 से आगे रहीं.

साक्षी की वापसी

साक्षी ने दूसरे राउंड में आते ही दमदार खेल दिखाया और टेकडाउन से दो अंक लिए और फिर पिन कर गोल्ड जीता. पहले राउंड में साक्षी ने जिस तरह से बैकफुट पर थीं उसे देखकर लग नहीं रहा था कि वह जीत हासिल कर पाएंगी लेकिन दूसरे राउंड में आते ही उन्होंने अपना दम दिखाया और एना को चित कर कुछ ही सेकेंड्स में बाजी पलट दी. ये कुछ उसी तरह से था जिस तरह से साक्षी ने रियो ओलिंपिक-2016 में आखिरी समय मे पांच अंकों का दांव लगाते हुए भारत की झोली में कांस्य पदक डाला था. साक्षी ने इस मैच में ही कुछ ऐसा कारनामा किया और कुछ ही सेकेंड्स में हार को पीछे छोड़ जीत हासिल की.

ऐसा रहा सफर

ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक अंतिम चार मुकाबले में कैमरून की बर्थे इमिलिएने इटाने एनगोले पर तकनीकी श्रेष्ठता से 10-0 की जीत से फाइनल में पहुंची थीं. इससे पहले साक्षी ने क्वार्टरफाइनल में भी तकनीकी श्रेष्ठता से जीत हासिल की. उन्होंने इस शुरुआती मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड की केलसे बार्नेस को मात दी. साक्षी के नाम स्वर्ण पदकों की कमी है. उन्होंने अभी तक अपने करियर में 2017 में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण और 2012 में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है. इसके अलावा उनका दामन खाली ही रहा है.

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