रोते हुए छलका रतन राजपूत के दिल का दर्द कहा ,मैं जलूं तो मेरी अस्थियां यहां लाकर रख देना…

मित्रों किसी से भी कम नहीं है बिहार की बेटियां बिहार की कई बेटियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने टैलेंट और हुनर की बदौलत से देश विदेश में बिहार का नाम रोशन किया है बिहारी पहचान की इस कड़ी में हम बात करने वाले है बिहार की बेटी एक्ट्रेस रतन राजपूत के बारे में जो अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो से टीवी शो से फेम्स हुई रतन राजपूत इन दिनों शहरी लाइफ को छोड़ कर गांव की देसी लाइफ में मग्न नजर आ रही हैं इसलिये रतन को लेकर उनके फैंस के मन में कई प्रकार के सवाल भी उठ रहे हैं आगे जानने के लिए पोस्ट के अंत तक बने रहिये

मैं जलूं तो मेरी अस्थियां यहां लाकर रख देना..’,फूट-फूट कर रोते हुए क्यों ऐसा बोलीं रतन राजपूत, भावुक है Video

दरअसल रतन राजपूत का बचपन बिहार के शहर आरा में बीता है। अपने ब्लॉग में रतन राजपूत ने उस घर को भी दिखाया है, जहां उन्होंने अपना  बचपन बीताया. रतन के पिता जी सरकारी अधिकारी थे इसलिए उनका बचपन सरकारी घर में बीता.  उस  सरकारी घर में  पहुंचकर वो एकदम इमोशनल हो गईं। इस कोठी के अंदर कदम रखते ही रतन ने सारी चीजों के बारे में बताया । इस सरकारी बंगले के बाहर एक पाकड़ का पेड़ है और वही पेड़ रतन का खास है। रतन ने बताया कि इसी पेड़ के नीचे उनका पूरा बचपन गुजरा है। यहां वो घटों बैठकर अपने भाई-बहनों के साथ बात किया करती थीं। रतन ने कहा कि ये पेड़ उनका दोस्त, गुरु और ना जाने क्या-क्या है। रतन ने यहां अपने पिता की वो पुरानी गाड़ी भी देखी, जिसमें बैठकर वो घूमने जाती थीं। रतन ने वो गाड़ी भी दिखाई, जिसकी हालत आज खस्ताहाल है। रतन राजपूत फिलहाल किसी टीवो शो में नहीं आ रही हैं। रतन राजपूत ने कहा है कि वो अगले साल से टीवी में फिर से वापसी करने का प्लान बना रही हैं।

रतन ने आगे कहा मैं यहां और देर नहीं रहने वाली हूं ऐसा लग रहा है मेरे अंदर बाढ़ आ रही है। मैं कितनी बड़ी हो जाऊं एक होता है ना लोग नदी में बहना चाहते हैं जलने के बाद। मुझे लगता है कि मैं जब जलूं तो मेरी जो थोड़ी सी अस्थियों हो वो यहां लाकर रख दें। बहुत जरूरी है ये जगह मेरे लिए खासकर ये पेड. जब मैं जलूं तो मेरी अस्थियां यहां लाकर रख देना ये बात टीवी एक्ट्रेस रतन राजपूत ने अपनी एक पुरानी दोस्त से मिलने के बाद कही है। रतन राजपूत पाकड़ के पेड़ के नीचे बैठकर बोलती हैं मैं बड़ी हो गई हूं ये पेड़ मुझे देखकर सोच रहा होगा कितनी बड़ी हो गई है ये। रोते हुए कहा हम इंसानों के साथ-साथ इनकी भी मोमॉरी होती है। पहचान गया होगा ये। बहुत वक्त बिताया है यह गाडी  को देखकर तो मेरी हालात ही खराब हो गई है बर्दाश्त नहीं हो रहा है। सारी पुरानी यादें फ्लैश हो रही हैं। पता नहीं जब हम 6 भाई-बहन एक साथ आएंगे यहां तो कितना एक साथ मिलकर रोएंगे क्योंकि यहां पर सबका बेस्ट टाइम और याद है। रतन राजपूत का  यह वीडियो बहुत वायरल हो रहा है। रतन राजपूत ने आगे कहा कोई नहीं समझ पाता या कोई समझ नहीं पाएगा। ये कनेक्शन शायद, हम दोनों का है। जो कोई नहीं समझ पाएगा। पता नहीं हम दोनों का कौन सा रिश्ता है मां बेटे का भाई-बहन का या प्रेमी-प्रेमिका और गुरु शिष्य का मुझे नहीं पता लेकिन कुछ तो है जो बहुत गहरा है। शायद मेरा पहला टीचर है ये। चलो चलो यहां से चलते हैं ।रतन का ये वीडिया बेहद भावुक है। रतन ने इस वीडियो में दिखाया है

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