राहुल गांधी ने अमेरिकी एक्सपर्ट से की भारत में असहि’ष्णुता की शिका’यत, मिला ऐसा जवाब

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शुक्रवार को राहुल गांधी ने कोरोनावायरस का दुनिया पर क्या असर हो रहा है, इसको लेकर पूर्व अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स से बातचीत की। बातचीत में कोरोना के साथ-साथ भारत और अमेरिका के रिश्तों पर, दोनों देशों की मौजूदा स्थिति पर भी बात की गई।

नई दिल्ली। शुक्रवार को राहुल गांधी ने पूर्व अमेरिकी राजदूत और विदेशी मुद्दों के जानकार प्रोफेसर निकोलस बर्न्स से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की। इस बातचीत में राहुल गांधी ने अमेरिका और भारत को लेकर असहिष्णुता का मुद्दा उठाया। इस मुद्दे पर राहुल को उम्मीद थी कि बर्न्स कुछ बोलेंगे लेकिन उल्टे बर्न्स ने इस पर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को अधिनायकवादी चीन का उदाहरण दे डाला।

Rahul Gandhi

निकोलस बर्न्स से बातचीत में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि, आपने बताया कि अमेरिका एक प्रवासी राष्ट्र है। हम बहुत सहिष्णु राष्ट्र हैं। हमारा डीएनए सहनशील माना जाता है। हम नए विचारों को स्वीकार करने वाले हैं। हम खुले विचारों वाले हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वह अब गायब हो रहा है। यह काफी दुखद है कि मैं उस स्तर की सहिष्णुता को नहीं देखता, जो पहले देखता था। ये दोनों ही देशों में नहीं दिख रही। न मुझे यह भारत में दिखता है और न ही अमेरिका में।

चीन को लेकर क्या कहा..

इसपर निकोलस बर्न्स ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए कहा कि, “मुझे लगता है कि आपने अमेरिका के एक केंद्रीय मुद्दे की पहचान की है। आशा कि किरण और अच्छी खबर यह है कि हमारे यहां पूरे हफ्ते संयुक्त राज्य अमेरिका के हर प्रमुख शहर में सहिष्णुता, समावेशन, अल्पसंख्यक अधिकारों के आधार पर इस सप्ताह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले लोग हैं। ये सभी आवश्यक मुद्दे हमारे लोकतंत्र के मूल में हैं। मुझे लगता है कि चीन जैसे अधिनायकवादी देश के मुकाबले लोकतंत्रवादियों के पास फायदा है कि हम खुद को सही कर सकते हैं। स्वयं ही खुद को सही करने का का भाव हमारे डीएनए में है।”

‘मैं आपके देश पर टिप्पणी नहीं कर सकता’

उन्होंने कहा कि, “लोकतंत्र के जरिए हम इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में मतपेटी के जरिए हम करते हैं। हम हिंसा कि ओर नहीं मुड़ते। हम ऐसा शांति से करते हैं। वही भारतीय परंपरा है। जिसके कारण हम आपकी स्थापना के समय से ही भारत से प्यार करते हैं। 1930 का विरोध आंदोलन, नमक सत्याग्रह से 1947-48 तक।” भारत को लेकर बर्न्स ने कहा कि, “मुझे लगता है कि मैं आपके देश पर टिप्पणी नहीं कर सकता, क्योंकि मैं इसे उतना नहीं जानता। लेकिन मेरे देश के बारे में मैं बोल सकता हूं कि हम वापस आ जाएंगे।”

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कोरोनावायरस का दुनिया पर असर

बता दें कि शुक्रवार को राहुल गांधी ने कोरोनावायरस का दुनिया पर क्या असर हो रहा है, इसको लेकर पूर्व अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स से बातचीत की। बातचीत में कोरोना के साथ-साथ भारत और अमेरिका के रिश्तों पर, दोनों देशों की मौजूदा स्थिति पर भी बात की गई। इसमें राहुल गांधी ने कहा कि दोनों जगहों पर ऐसी सरकारें है जो खुद को राष्ट्रवादी बताती हैं लेकिन समाज बांटने का काम करती हैं। इसके साथ ही राहुल ने लॉकडाउन पर भी सवाल खड़े किए।

1 thought on “राहुल गांधी ने अमेरिकी एक्सपर्ट से की भारत में असहि’ष्णुता की शिका’यत, मिला ऐसा जवाब

  1. ये देश राहुल और उनके परिवार को इतने समय से सहन कर रहा है। भला सहिष्णुता का इससे बड़ा कोई उदाहरण हो सकता है?

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