दिमागी तौर पर मृत लड़की के अंगों ने पांच लोगों कि बचाई ज़िन्दगी,सेना के दो जवानों को ट्रांसप्लांट हुई किडनी

दोस्तो इस दुनिया में बहुत तरह के लोग होते है जिनमे से कुछ किसी को कुछ नही समझते न किसी की मदद करते है न ही सम्मान जो जीते जी किसी के काम न आए हो वो मरने के बाद किसी के लिए क्या करके जायेंगे ऐसे लोगो को कोई याद नहीं रखता । लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है जो अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते है उनके दिल में सभी के लिए प्रेम , दया और सम्मान की भावना होती है ऐसे लोग किसी को दुखी नहीं देख सकते और हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहते है ।आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने वाले है जिसने दुनिया से जाने के बाद भी पांच लोगो को दिया जीवन दान ।क्या है पूरा मामला जानने के लिए खबर को अंत तक जरूर पढ़े।

परिवार की इच्छा पर दान किया गया अंग

रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, एक युवा महिला को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कमांड अस्पताल (दक्षिणी कमान) (सीएचएससी) में लाया गया था, लेकिन उसमें मस्तिष्क में जीवन के महत्वपूर्ण लक्षण मौजूद नहीं थे. ऐसे में अस्पताल के प्रत्यारोपण समन्वयक के साथ चर्चा के बाद परिवार ने चाहा कि महिला के अंग उन रोगियों को दान कर दिए जाएं, जिन्हें उनकी सख्त जरूरत है.

ऐसे किया गया अंगों का प्रत्यारोपण

रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, आवश्यक मंजूरी के बाद कमांड अस्पताल (दक्षिणी कमान) में प्रत्यारोपण टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और अलर्ट को जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेडटीसीसी) और आर्मी ऑर्गन रिट्रीवल एंड ट्रांसप्लांट अथॉरिटी (एओआरटीए) को भी भेज दिया गया. जुलाई, 14 की रात और 15 जुलाई की सुबह के दौरान किडनी जैसे अंगों को भारतीय सेना के दो सेवारत सैनिकों में प्रत्यारोपित किया गया. वहीं आंखों को सीएच (एससी) सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज परिसर के आई बैंक में संरक्षित किया गया और पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में एक मरीज को लीवर दिया गया.

पांच लोगों को जीवन और दृष्टि मिली

मौत के बाद अंगदान का एक उदार संकेत और सीएच (एससी) में एक अच्छी तरह से समन्वित प्रयास ने गंभीर रूप से बीमार पांच रोगियों को जीवन और दृष्टि प्रदान की. रक्षा मंत्रालय के पीआरओ ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में जरूरतमंद रोगियों के लिए अंग दान की अमूल्य भूमिका के बारे में जागरूक करती है. यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि अपने अंगों को स्वर्ग में मत ले जाओ, भगवान जानता है कि हमें यहां उनकी आवश्यकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.