सात हजार साल पहले बनाया गया था रामसेतु, नासा ने भी कबूल की ये बात

सात हजार साल पहले बनाया गया था रामसेतु, नासा ने भी कबूल की ये बात

मित्रों जैसा की आप सभी अवगत ही होगें कि समुद्र पर बने रामसेतु को दुनियाभर में एडेम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है। हिंदु धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह एक ऐसा पुल है जिसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने वानर सेना संग लंका पहुंचने के लिए बनवाया था। यह पुल भारत के रामेश्वरम से शुरु होकर श्रीलंका के मन्नार को जोड़ता है। आपको बता दें कि कुछ समय पहले ही अमेरिकी साइंस चैनल ने यह दावा किया कि रामसेतु वाकई मौजूद है और इसे रामायण काल से संबंधित बताया। तो आइए जाने रामसेतु का अबतक का सबसे बड़ा रहस्य।

आपको बता दें कि रामसेतु को नल और नील ने 5 दिन में बनवाया था ऐसा कहा जाता है कि इसका निर्माण चूने और पत्थर से किया गया ये 30 किलोमीटर लंबा और 3 किलोमीटर चौड़ा बनाया गया है भारत द्वीप के पुम्बन धनुषकोड़ी से शुरू होकर मन्नार द्वीप पर खत्म हो जाता है इन जगहों पर समुद्र बहुत ही बड़ा है. इस पुल को पत्थरों से बनाया गया था जो नल और नील के छूने से ही समुद्र में रुक जाते थे समुद्र के अंदर इन चट्टानों की गहराई 3 फुट से लेकर 30 फुट तक है 15 वीं शताब्दी में इसके जरिए रामेश्वरम से मन्नार तक जा सकते थे परंतु वर्ष 1480 में यह एक तूफान के कारण टूट गया था तो आपको बताते हैं नासा के वैज्ञानिक रामसेतु के बारे में कहते हैं कि यहाँ जो रेत है वह प्राकृतिक हो सकती है परंतु उनके ऊपर जो पत्थर है उनको किसी ने बहुत दूर से लाकर यहां पर रख दिया था यहां की रेत करीब चार हजार साल पुरानी है पर एक बात बहुत अजीब है कि जो रेत के ऊपर की चट्टाने है वह रेत से भी ज्यादा पहले की है, नासा के द्वारा दिखाई गई तस्वीरों के हवाले से कहा गया है कि यहां की चट्टाने प्राकृतिक नहीं बल्कि इंसान के द्वारा बनाई गई है आश्चर्य करने वाली बात तो यह है कि धनुषकोड़ी और मन्नार द्वीप के बीच जो समुद्र है उसकी कार्बन डेटिंग और रामायण की तारीख मिलती जुलती है।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि हमारे पुराणों के रामायण में होने वाली घटनाओं का समय जो बताया गया वह भी यही समय है इस निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए वैज्ञानिकों ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर और बहुत से अवशेषों की कार्बन डेटिंग के सारे वैज्ञानिकों ने दोनों को जोड़ा तो वह दोनों एक ही निकली परंतु इस बात को और भी पक्का करने के लिए वैज्ञानिकों ने वाल्मीकि रामायण के सहारे वाल्मीकि रामायण में लिखे हुए दार काल के सहारे पैरोलिटम सॉफ्टवेयर की सहायता से उस काल के समय का पता लगाया गया तो यह अवधि करीब सात हजार सालों पहले की बतायी गई उसके बाद से समुद्र में हो रहे जलस्तर के बदलावों को जानने के लिए गणना भी की गई तब या पता चला कि तब से लेकर अब तक समुद्र का जलस्तर 3 मीटर अधिक बढ़ गया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि रामसेतु के पत्थर इतने नीचे ही पाए जाने लगे इसका मतलब रामसेतु के पत्थर तब सतह से ऊपर पाए जाते थे और एक पुल की तरह दिखते थे कहा जाता है कि राम सेतु के पुल का पता चलने के बाद रामसेतु के पत्थरों में उपस्थित सूक्ष्मजीवों की कार्बन डेटिंग की गई और तब यह पता चला इनकी अवधि भी सात हजार साल पहले की थी जिससे यह बिल्कुल साफ हो गया कि वाल्मीकि रामायण में दर्ज काल और रामसेतु के पत्थर एक ही समय को बताते हैं इन सभी सबूतों और इतिहास के प्रमाणों के मुताबिक या तो तय हो गया है कि सच में यहां पर एक पुल था परंतु इसका निर्माण रामायण काल में भगवान राम के देखरेख में किया गया था या नहीं या फिर इसको किसी और ने बनवाया था इस बात पर वैज्ञानिक आज भी चुप हैं। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है।

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