काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर पर बिजली गिरने से टुटा शिखर का हिस्सा, जानिए किस बात है अशुभ संकेत

दोस्तो खराब मौसम की वजह से तूफान आना लाजमी है लेकिन कभी कभी तूफान इतना ज्यादा आता है कि बारिश और बिजली साथ लाता है और ये बिजली कही न कही जरूर गिरती है जिससे भारी नुकसान होता है ।मेदनी ज्योतिषानुसार मंदिर के शिखर या ध्वज को यदि किसी प्रकार की क्षति पहुंचती है या इन पर बिजली गिरे तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है ।ऐसे में खबर सामने आई है कि काशी विश्वनाथ के परिसर में मन्धातेश्वर मंदिर पर बिजली गिर गयी है .तो मन्दिर पर बिजली गिरना किसी अशुभता का संकेत तो नही है . जानने के लिए खबर को अंत तक जरुर पढ़े .

मंगलवार शाम 28 जून को वाराणसी स्थित श्री काशीविश्वनाथ मंदिर परिसर में मन्धातेश्वर मंदिर के शिखर पर बिजली गिरने से शिखर का एक हिस्सा टूट कर दूर जा गिरा। मेदिनी ज्योतिष में मंदिर शिखर या ध्वज पर बिजली गिरना या उनका टूटना एक अशुभ शकुन माना जाता है। गत वर्ष 13 जुलाई को गुजरात के प्राचीन द्वारकाधीश मंदिर की गुंबज पर 52 गज की ध्वजा पर बिजली गिरने से उसमें आग लग गयी थी, जिससे मंदिर की कुछ दीवारें काली भी पड़ गई थी। पांचवी सदी के ग्रंथ बृहत् संहिता के ‘इन्द्रध्वज-संपदध्यय:’ में ध्वजा पर बिजली गिरने को राजा और उसकी रानी के लिए एक अपशकुन कहा गया है।

उस समय प्रकाशित एक लेख में द्वारकाधीश मंदिर की गुंबद पर बिजली गिरने को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी के लिए अशुभ शकुन बताया गया था। बाद में एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में 12 सितंबर को मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने अपने सभी मंत्रियों के साथ इस्तीफा दे दिया और केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर भूपेंद्र भाई पटेल के नए मुख्यमंत्री बनने की राह तैयार हुई पिछले वर्ष ठीक इसी समय गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर के शिखर पर बिजली का गिरना वहां के मुख्यमंत्री के सिंहासन के लिए अशुभ साबित हुआ। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अब वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में शिखर पर बिजली गिरना क्या उत्तर प्रदेश और उसके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए कुछ अशुभ संकेत दे रहा है।

क्या योगी आदित्यनाथ का सामना होगा इन चुनौतियों से?

उत्तरप्रदेश के मुखयमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को सुबह 10 बजकर 54 मिनट पर पौड़ी, उत्तराखंड में हुआ था। सिंह लग्न में पैदा हुए योगी आदित्यनाथ ने अभी हाल ही में इतिहास रचते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव जीतकर दोबारा सत्ता में वापसी की है। इसके बाद अप्रैल के महीने से प्रदेश में कुछ सांप्रदायिक तनाव के बाद असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्यवाही वह चर्चा में बने रहें।

अब उनके सूबे के एक प्रतिष्ठित और प्राचीन मंदिर के शिखर पर बिजली गिरने का शगुन आने वाले 6 महीनों में अपने अशुभ परिणाम दे सकता है l इनकी सिंह लग्न की कुंडली में वर्तमान में केतु में गुरु की शुभ दशा 15 अक्टूबर 2022 तक है, इसके बाद 15 अक्टूबर के बाद से यह अगले एक वर्ष के लिए केतु में शनि की अशुभ विंशोत्तरी दशा का फल ग्रहण करेंगे।

इनकी कुंडली में केतु बाहरवें घर में शनि की तीसरी दृष्टि से पीड़त हैl केतु में शनि की विंशोत्तरी दशा अक्टूबर 2022 के मध्य से 24 नवंबर 2023 तक रहेगी जिसमें योगी आदित्यनाथ को कुछ प्रतिकूल स्थितियों और चुनौतियों से गुजरना पड़ सकता हैl इनको प्रदेश में कानून-व्यवस्था, रोजगार के मुद्दों, राजनीतिक उठा-पटक, विरोधी दलों से तनाव आदि का सामना करना पड़ सकता है।

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