माँ-बाप ने पैदा होते ही अनाथालय में छोड़ा,बेटी कि किस्मत चमकी मेहनत कर बनी ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की कप्तान

दोस्तों आज हम एक ऐसी खिलाडी के बारे में बात करने जा है जिसका जीवन काफी ज्यादा संघर्षपूर्ण रहा है  इनका जीवन तमाम कठिनाइयों से भरा था लेकिन इन तमाम कठिनाइयों को दूर करके लिसा स्टालेकर ने 2013 में इंटरनेशनल क्रिकेट रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कमेट्री को अपना करियर बना लिया जिससे उनको एक अलग पहचान मिली, पुणे राज्य में जन्म लेने वाली भारतीय मूल की लिसा का आस्ट्रेलिया तक का सफ़र काफी आसान नही था फिर भी आस्ट्रेलिया महिला टीम की कप्तानी तक का भी सफ़र तय किया है तो आइये जानते है कि इनकी कहानी अन्य खिलाडियों के मुकाबले बिलकुल अलग और दर्दनाक क्यों है जानने के लिए लेख के अंत तक बने रहे

कठिनाईयों से भरा रहा बचपन का सफर :-

लिसा स्टालेकर (Lisa Sthalekar) को उनके माता-पिता ने बचपन में ही अनाथालय में छोड़ दिया था। महाराष्ट्र के पुणे शहर के श्रीवास्तव अनाथालय में सुबह-सुबह कोई लिसा स्टालेकर को अनाथालय के बाहर छोड़ कर चला गया था। अनाथालय के प्रबंधक ने लिसा का नाम पहले लैला रखा था लेकिन हरेन और सू नाम की अमेरिकी जोड़ी भारत घूमने तो आयी और साथ ही उनका मकसद किसी लड़के को गोद लेना था। और जानकारी के मुताबिक बता दे कि उन दोनों के पास पहले से ही एक बेटी थी जिसके बाद उन्हें एक सुंदर लड़के की तलाश थी। हालांकि, अनाथालय में उन्हें लड़का तो नहीं मिला लेकिन सू की नजर लैला पर पड़ी और वो उसे देखती ही रह गयीं, जिसके बाद दोनों पति-पत्नी के जोड़े ने लैला को गोद ले लिया और उसका नाम बदलकर लिसा रख दिया, जिसके बाद वो उसे लेकर भारत से अमेरिका वापस लेकर चले गये।

अमेरिका से सिडनी में जाकर बस गयीं लिसा:-

भारत से जाने के बाद लिसा अपने नये परिवार के साथ अमेरिका में रहने लगीं लेकिन वहां कुछ समय बिताने के बाद लिसा अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बस गयीं। यहीं से लिसा स्टालेकर के क्रिकेट के सफर की शुरूआत हुई। उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट खेलना सिखाया, जिसके बाद से उन्होंने अपने गली के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया। क्रिकेट के लिए उनका जुनून अपार था। इसके बाद उन्होंने साल 2001 में ऑस्ट्रेलियाई नेशनल टीम की तरफ से अपना डेब्यू किया और इसके बाद उनका ये जुनून ऑस्ट्रेलिया के लिए कई मौको पर फायदे मंद साबित हुआ।

वर्ल्ड कप में निभाई अहम भूमिका:-

आईसीसी रैंकिंग जब शुरू हुई तो लिसा स्टालेकर की गिनती दुनिया के नंबर वन ऑलराउंडरों में थी। वनडे में 1000 रन और 100 विकेट लेने वाली पहली महिला क्रिकेटर लिसा ही थी। इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलिया को वनडे और टी20 में मिलाकर वर्ल्ड कप में 4 बार खिताब जिताने में भी उनकी अहम भूमिका रही है। उन्हें ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट हॉल ऑफ फेम भी मिला है। संन्यास लेने से पहले तक लिसा स्टालेकर अपनी टीम के लिए जो योगदान दिया वो अद्भुत था।

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