पा”किस्तान में कमरतोड़ महंगाई, 555 रूपरे पहुंची घी की कीमत,तेल हुआ 650 रुपये महंगा,लोगो का हुआ बुरा हाल

दोस्तो आजकल महंगाई बढ़ती ही जा रही हैं हर चीज की कीमतें आसमान छू रही है ऐसे में जनता को बहुत परेशानी हो रही है ।आपको बता दे खासकर घी और खाना पकाने के तेल में भारी उछाल होने की वजह जनता को दो टाइम खाना खाना भी दुश्वार हो गया है पहले तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने जनता को सताया हुआ था लेकिन अब खाने के तेल और घी की कीमतों ने जनता के नाक में दम कर रखा है क्या है तेल और घी की नई कीमतें जानने के लिए खबर को अंत तक जरूर पढ़े ।

इंडोनेशिया की ओर से 23 मई को पाम ऑयल पर निर्यात प्रतिबंध हटाने के बावजूद, एक भी लदा हुआ जहाज पाकिस्तान को शिपमेंट के लिए समुद्र या इंडोनेशिया बंदरगाह पर नहीं था। पाकिस्तान सरकार की ओर से घी और खाना पकाने के तेल की कीमतों में अभूतपूर्व- 208 रुपए और 213 रुपए की बढ़ोतरी करके जनता को हैरान कर दिया है। इसके साथ ही अब पाकिस्तान में घी 555 रुपए प्रति किलोग्राम और तेल के दाम 605 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कराची में यूटिलिटी स्टोर्स कॉरपोरेशन (यूएससी) के एक अधिकारी ने डॉन को पुष्टि की कि यूएससी ने 1 जून से प्रभावी घी और खाना पकाने के तेल की कीमतों में इस भारी उछाल की अधिसूचना जारी की है।

हालांकि, अधिकारी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि दरों में इतनी बढ़ोत्तरी क्यों की गई, जिसका उपभोक्ताओं पर बुरा असर पड़ेगा। खुदरा बाजारों में प्रसिद्ध ब्रांड के घी और खाना पकाने वाले तेल की अधिकतम दर अभी भी 540-560 रुपए प्रति किलोग्राम/लीटर के बीच है। हालांकि, पाकिस्तान वनस्पति मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (पीवीएमए) के महासचिव उमर इस्लाम खान ने संकेत दिया कि घी और खाना पकाने के तेल की खुदरा दरें जल्द ही यूएससी की कीमतों के बराबर आ जाएंगी।


दो तीन अरब हुआ कि घी/खाना पकाने के तेल निर्माताओं ने यूएससी को उत्पादों को क्रेडिट पर देना बंद कर दिया है, क्योंकि निगम ने निर्माताओं को 2-3 अरब रुपए का बकाया नहीं दिया है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, उमर ने कहा कि संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों और पीवीएमए के पदाधिकारियों सहित ताड़ के तेल की आपूर्ति पर प्रधानमंत्री टास्क फोर्स समिति ताड़ के तेल की मांग और आपूर्ति की स्थिति का विश्लेषण करने के लिए जूम बैठकें कर रही है।

इंडोनेशिया ने हटाया प्रतिबंध लेकिन नहीं भेजी खेप
उन्होंने कहा कि कराची के दोनों बंदरगाहों पर लगभग 1,60,000 टन पाम तेल का स्टॉक उपलब्ध है, जो तीन सप्ताह की खपत के लिए पर्याप्त है। इंडोनेशिया की ओर से 23 मई को पाम ऑयल पर निर्यात प्रतिबंध हटाने के बावजूद, एक भी लदा हुआ जहाज पाकिस्तान को शिपमेंट के लिए समुद्र या इंडोनेशिया बंदरगाह पर नहीं था। इमरान खान के जाने के बाद सत्ता में आए शहबाज शरीफ के सामने महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था जैसी कई चुनौतियां हैं। बड़े-बड़े वादों के बाद भी वह हालात पर काबू पाने में फेल होते दिख रहे हैं।


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