सर्वे में हुआ खुलासा, मां-बाप के साथ नहीं रहने वाले पति की होती है ज्यादा पिटाई,

दोस्तों कोई भी न्यूज पेपर देख लो या कोई भी न्यूज चैनल लगा लो .कोई न कोई खबर ऐसी देखने या पढने को जरुर मिलेगी जिसमे महिलाओ के साथ हिंसा हुयी हो .महिलाओ के साथ हिंसा के हजारो मामले हर शहर के पुलिस थानों में दर्ज है .शायद ही कोई मामला ऐसा होगा जिसमे पुरुषो के साथ घरेलू हिंसा का मामला सामने आया हो आज हम आपको ऐसे ही एक मामले के बारे में बताने वाले है जिसमे एक पुरुष के साथ घरेलू हिंसा की खबर सामने आ रही है .

.ये मामला राजस्थान के अलवर का है जिसका वीडियो वायरल काफी वायरल हो रहा है जिसमें पत्नी अपने पति को क्रिकेट बैट से पीट रही है। पति एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं और उन्होंने 9 साल पहले लव मैरिज शादी की थी। इस वीडियो के वायरल होने के बाद यह बहस छिड़ गई है कि भारत में क्या पुरूष भी घरेलू हिंसा का शिकार हो रहे हैं। तो इसका जवाब नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) देता है। उसके अनुसार देश में करीब 4 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने कभी न कभी अपने पति के साथ घरेलू हिंसा की है। उन्होंने ऐसा तब किया है जब उनके पति ने उनके साथ कोई घरेलू हिंसा नहीं की थी। यानी विरोध में उन्होंने ऐसा नहीं किया है।

न्यूकिलयर फैमिली में ज्यादा मामले

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (National Family Health Survey-5) 2019-2021 की रिपोर्ट के अनुसार ऐसे पति-पत्नी जो न्यूक्लियर फैमिली (केवल पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे) में रहते हैं। उनमें सबसे ज्यादा महिलाएं अपने पति के साथ घरेलू हिंसा करती है। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में न्यूक्लियर फैमिली में रहने वाली 3.9 फीसदी महिलाओं ने कभी न कभी अपने पति के साथ हिंसा की है। जबकि संयुक्त परिवार या गैर न्यूक्लियर फैमिली में 3.3 फीसदी महिलाओं ने अपने पति के साथ हिंसा की है। सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि 3 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने पिछले 12 महीने में अपने पति के साथ हिंसा की है।

पढ़ाई की कितनी भूमिका

सर्वे के अनुसार पति के खिलाफ शारीरिक हिंसा या घरेलू हिंसा के मामले में शिक्षा के स्तर की भी अहम भूमिका रही है। मसलन ऐसे पति -पत्नी जिसमें पति ने ज्यादा पढ़ाई की है, उनके साथ हिंसा करने वाली पत्नियों की संख्या 3.1 फीसदी है। लेकिन जहां पर पति से ज्यादा महिलाएं पढ़ी हुई हैं, वहां हिंसा करने वाली पत्नियों की संख्या 3.7 फीसदी है। जबकि ऐसे मामले जिसमें पति और पत्नी दोनों नहीं पढ़े हुए हैं, वहां पर 5.6 फीसदी पत्नियां हैं, जिन्होंने अपनी पति के साथ हिंसा की है।

इसी तरह पत्नियों द्वारा पिटाई के मामलों में आर्थिक आधार की अहम भूमिका देखती है। सर्वे के अनुसार सबसे निचले आय वर्ग में 4.8 फीसदी, मध्यम वर्ग में 3.8 फीसदी और उच्च आयवर्ग में 2.1 फीसदी महिलाओं ने कभी न कभी अपने पति के साथ हिंसा की है। आंकड़ों से पता चला है कि पतियों को मारने के लिए पत्नियां बेलन, बेल्ट, जूते व किचन के अन्य सामानों का इस्तेमाल करती हैं। यहां कुछ लोगों को सुनने में यह मजेदार लग सकता है, लेकिन भारत इस हिंसा में तीसरे स्थान पर है और यह किसी भी तरह से गर्व करने का विषय नहीं हो सकता।

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