चार बेटे, एक भी मां बाप को रखने को तैयार नहीं,भंडारों में भोजन करने को मजबूर हुए बूढ़े माँ-बाप

जब घर में कोई बच्चा पैदा होता है तो मां बाप उसे अपनी जान से भी बढ़कर चाहते हैं। उसकी परवरिश में कोई कमी नहीं रहने देते हैं। खुद भले गरीबी और तकलीफ में जी लें लेकिन बच्चों की खुशियों पर कोई आंच नहीं आने देते हैं। लेकिन अफसोस की बड़े होकर कुछ बच्चे अपने मां बाप को ही भूल जाते हैं। वे उनका अपमान करते हैं। उन्हें बोझ समझते हैं। कुछ तो उन्हें घर से भी निकाल देते हैं। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भी देखने को मिला है।

चार बेटे, एक भी मां बाप को रखने को तैयार नहीं

इंदौर के राधिका कॉलोनी सुखलिया में रहने वाले दंपती ओमप्रकाश और सूरजा नागवंशी के चार बेटे हैं। इन सभी की शादियाँ हो चुकी है। सबसे बड़ा बेटा कमलेश का टेलरिंग का कारखाना है। दूसरे बेटे दीपक की ट्रेजर आईलैंड में जॉब है। तीसरा बेटा विजय इलेक्ट्रिशियन है। वहीं चौथे बेटे की भी एक अच्छी खासी जॉब है। मतलब चारों बेटे आर्थिक रूप से सक्षम है। लेकिन चारों में से एक भी अपने मां बाप को ठीक से नहीं रख रहा है।

दंपति का आरोप है कि उन्होंने जब से अपना दो मंजिला मकान चारों बेटों को रहने के लिए दिया तब से ही वे सभी उन्हें इग्नोर करने लगे। बहूएं उनके संग बुरा व्यवहार करने लगी। घर में उनसे झाड़ू-पोछा जैसे काम करवाए जाने लगे। दूसरी मंजिल तक बाल्टियों से पानी भरवाया गया। यहां तक कि बीमार होने पर कोई इलाज भी नहीं करवाया। बेटों को अपने मां बाप को रखने में ही शर्मिंदगी महसूस होने लगी। हमारी चारों औलादें बेकार हैं।

आलम ये आया कि बूढ़े मां बाप भंडारों में भोजन कर अपना जीवन यापन करने लगे। वे इंदौर के पाटनीपुरा स्थित साईं बाबा मंदिर के भोजनालय में 5 रुपए की रसीद कटाकर वहां भोजन कर लेते हैं। कभी कोई रिश्तेदार उनकी पैसों की मदद कर देता है। जब दंपति अपने रिश्तेदारों के घर जाने लगे। उन्हें सारी कहानी सुनाने लगे। तो बेटों ने पिता को धमकी दे डाली कि तुम्हें बहू से छेड़छाड़ के आरोप में अंदर करवा देंगे।

कोर्ट ने दिया बेटों को पैसे देने का आदेश

जब पानी सिर से ऊपर जाने लगा तो थक हारकर दंपति नवंबर 2019 में वे एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे से मिला। उनकी मदद से उन्होंने अपने चारों बेटों पर केस ठोक दिया। अब शुक्रवार (29 जुलाई) इस मामले पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चारों बेटों को माता पिता को भरण-पोषण के लिए 1.92 लाख रुपए देने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही कहा कि हर बेटा अपने मां बाप को 1500 रुपए प्रति माह (यानि सभी मिलकर कुल 6 हजार रुपए प्रति माह) देगा। इसके अलावा कोर्ट ने बेटों को दंपति के केस में खर्च हुए 2 हजार रुपए देने के निर्देश भी दिए। कोर्ट ने कहा कि बूढ़े मां बाप के पालन पोषण की जिम्मेदारी बेटों की ही होती है। और सभी बेटे आर्थिक रूप से सम्पन्न भी है। उधर जब दंपति ने अपनी पूरी कहानी मीडिया को बताई तो उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े।

इन कानूनों पर भी एक नजर डाल लें

मां बाप और सीनियर सिटीजन के पालन पोषण और कल्याण के लिए एक एक्ट बनाया गया है। इसके अनुसार यह बच्चों का कर्तव्य होगा कि वे अपने मां बाप का अच्छे से भरण पोषण करे ताकि वे एक सम्मान के साथ जीवन जी सके। यदि पिता ने खुद अपनी प्रॉपर्टी खड़ी की है या वह किसी संपत्ति का मालिक है तो वह अपने बच्चों को उस संपत्ति से बेदखल कर सकता है। उसे बस जिला मजिस्ट्रेट में एक आवेदन देना होगा। वहीं दादा की संपत्ति है और वह बिना वसीयत के मर जाते हैं तो इस पर बाप और बेटे दोनों का हक होगा। यदि बच्चे गाली गलोज करते हैं तो मां बाप के पास उन्हें घर से निकालने का अधिकार है। फिर बच्चों के शादीशुदा होने या न होने से इसका कोई संबंध नहीं है।

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