कृष्णा पंडित का रोल निभा कर दुनिया पर छा गए दर्शन कुमार, स्क्रिप्ट पढ़के ही फूट-फूट कर रोए थे

दोस्तों कश्मीर फाइल्स में अभिनय करने वाले कलाकारों ने अपने किरदारों को बखूबी निभाकर किरदार में जान डाल दी है कि कोई भी अपने आप को उनकी तारीफ़ करने से रोक नही पा रहा  है .इस फिल्म को देखने वाला पूरी तरह फिल्म में खो जाता है और उसे ऐसा ही महसूस होता है मानो ये सब उन्ही के साथ हो रहा है .इस फिल्म में एक किरदार ऐसा भी है जिसने अपने अभिनय से सभी के रोंगटे खड़े कर दिए और वो किरदार है कृष्णा पंडित का जिसे अभिनेता दर्शन कुमार ने बखूबी निभाया है .अपने इस किरदार को निभाने के लिए दर्शन पूरी तरह किरदार में घुस गये थे . इस फिल्म की शूटिंग के बारे में बताते हुए दर्शन कुमार  ने कहा इस फिल्म की पूरी शूटिंग के दौरान ऐसा कोई दिन नहीं होगा जब  हमारी आंखों से आंसू न बहे हों .फिल्म की शूटिंग के लिए हमे बीच-बीच में कई बार ब्रेक लेने पड़ते थे  खुद पर लाख कण्ट्रोल करने के बाद भी में इस किरदार से बहार नही निकल पाया और शूटिंग के बाद मैं डिप्रेशन में चला गया था .

कृष्णा पंडित बनने के लिए लगा दी थी जान

मैंने कृष्णा पंडित की भूमिका में अपना दिल और आत्मा लगा दी थी और अब यह दर्शकों के दिलों को छू रही है। फिल्म को जिस तरह की प्रतिक्रिया मिल रही है, मैं पूरी तरह से प्रभावित हूं। पहली बार जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी थी, उसी समय मैं बहुत उत्साहित और साथ ही नर्वस भी। यह एक सच्ची घटना पर आधारित एक फिल्म है इसलिए मैंने जी जान लगा दी।

20 दिन में किया 10 किलो वजन कम

मैंने बीस दिनों में लगभग दस किलो वजन कम कर लिया था क्योंकि मुझे एक कॉलेज स्टूडेंट की भूमिका निभाना था। इस फिल्म के लिए मैं सुबह दो घंटे और शाम को डेढ़ घंटे कार्डियो करता था। मैंने कार्बोहाइड्रेट खाना बंद कर दिया था। मैं सुबह के समय बहुत कम मात्रा में कार्ब्स लेता था। मैं हर भोजन में ढेर सारा सलाद और तीस ग्राम प्रोटीन खाता था।

दर्शक भी खुद को कृष्णा पंडित समझने लगे

फिल्म में मैंने असली पीड़ितों से सच्ची कहानियां इकट्ठी कीं। लेकिन ईमानदारी से कहूं तो मैं हमेशा इस दुविधा में रहता था कि कौन सही है और कौन गलत। लेकिन मैं न्याय के लिए लड़ रहे कश्मीरी पंडितों के लिए हूं और जिन्हें उनके राज्य से बाहर निकाल दिया गया था। अफसोस की बात है कि कोई उन पर भरोसा नहीं कर रहा था। मैंने वे सभी वीडियो देखे जिनमें कश्मीरी पंडितों ने अपने दर्द के बारे में बात की। यह फिल्म पूरी तरह से अलग है। दर्शक भी खुद को कृष्णा पंडित समझने लगे हैं।

तेरह पन्नों का भाषण सबसे चुनौतीपूर्ण

एक अभिनेता के रूप में मेरे लिए तेरह पन्नों का भाषण सबसे चुनौतीपूर्ण मगर सबसे महत्वपूर्ण दृश्य था। पहले दिन से ही जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, मैं इसे लेकर बहुत उत्साहित था। मोनोलॉग को खूबसूरती से लिखा गया है। इसमें बहुत सारे ऐतिहासिक संदर्भ हैं, इसलिए मैं दर्शकों को समझाने से पहले खुद को समझाना चाहता था। चूंकि यह एक लंबा सीन था, इसलिए विवेक सर ने कहा था कि वह इसे दो दिनों में शूट करेंगे। लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि इस सीन को मैंने एक ही टेक में किया।

मैं विवेक सर और पल्लवी मैम को मुझ पर भरोसा करने और मुझे इस ईमानदार फिल्म का हिस्सा मानने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मुझे कास्टिंग डायरेक्टर तरुण बजाज का फोन आया और उन्होंने कहा कि वे मुझे ‘द कश्मीर फाइल्स’ में लीड के तौर पर कास्ट करना चाहते हैं। जब मैं विवेक अग्निहोत्री और पल्लवी जोशी से मिला, तो उन्होंने मुझे कृष्णा पंडित का वीडियो दिखाया, जिसका किरदार मैंने निभाया है। हमने उस व्यक्ति का नाम बदल दिया है। लेकिन जब मैंने उनके जीवन के बारे में उनकी कहानी सुनी, तो मैं पूरी तरह से हिल गया। बाद में मुझे 700 परिवारों के कुछ दिल दहला देने वाले वीडियो दिखाए गए। उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट थमाई और बिना कुछ सोचे समझे मैंने ‘हां’ कह दिया।

स्क्रिप्ट पढ़कर ही फूट-फूट कर रोए

जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तभी मुझे पता था कि लोग इसे पसंद करेंगे क्योंकि यह एक ईमानदारी सी बनाई गई सच्ची घटना पर बनी फिल्म है। आजकल दर्शक अच्छा और ईमानदार कंटेंट चाहते हैं जो जीवन के करीब हो। और ‘द कश्मीर फाइल्स’ इसी के बारे में है। अब यह लोगों की फिल्म बन गई है क्योंकि वे फिल्म का प्रचार और समर्थन कर रहे हैं।आज फिल्म की सफलता से लोग बहुत खुश हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा था तब मुझे सिर्फ छोटे रोल ही मिलते थे। मेरे पास बस का किराया तक देने के लिए पैसे नहीं होते थे। मैं पैसे बचाने के लिए 7 से 10 किलोमीटर  पैदल तक चलता था। मैंने इसे पहले कभी साझा नहीं किया, लेकिन एक बार की बात है मेरे पास एक ही जूते थे। चलते-चलते वह टूट गए तो मुझे नंगे पैर करीब 10 किलोमीटर चलना पड़ा। कई रातें ऐसी भी थी जब मैं सोया नहीं।

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