मंडप में केवल दो जोड़ी साड़ी देख भड़की दुल्हन ने शादी करने से किया इन्कार,खाली हाथ लौटी बारात

दोस्तों शादी ब्याह में नाराजगी लड़ाई झगड़े होते ही रहते है . लेकिन बाद में सब पहले जैसा हो जाता है . दरअसल शादी के माहौल में सभी व्यस्त होते है ऐसे में मेहमानों के खाने पीने हर सुविधा का इंतजाम किया जाता है लेकिन इसके बाद भी कुछ मेहमान ऐसे होते है जो चाहते है कि कोई उनकी स्पैशल खातिरदारी करे और ऐसा न होने पर वो नाराज हो जाते है लेकिन बाद में मान भी जाते है लेकिन यदि शादी के समय छोटी सी चीज़ की कमी होने पर दूल्हा या दुल्हन ही नाराज हो जाए और शादी से इंकार कर दे तो क्या किया जाए आज हम आपको ऐसे ही एक मामले के बारे में बताने वाले है .जिसमे एक डिमांड पूरी न होने पर दुल्हन ने पूरी बारात लौटाई वापिस क्या है पूरा मामला जानने के लिए खबर को अंत तक जरुर पढ़िए .

गोंडा में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। मंडप में साड़ी की संख्या कम होने से नाराज दुल्हन ने शादी करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद हुई पंचायत के बाद दोनों पक्ष शादी न करने पर राजी हो गए।बेलसर के आदमपुर गांव में एक मामला सामने आया है। बहु को पलकों पर बिठाने का वादा करने वाला वर जब डाल पर दो जोड़ी साड़ी लेकर ससुराल पहुंचा ताे उसके नीयत की पोल खुल गई। फिलहाल, लड़की ने वर के सरकारी नौकरी न करने पर शादी करने से मना कर दिया। इसको लेकर दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

दो जोड़ी साड़ी देख पिता ने बेटी की शादी से किया इन्कारः उमरीबेगमगंज के आदमपुर गांव में लड़की ने शादी करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद हुई पंचायत के बाद दोनों पक्ष शादी न करने पर राजी हो गए। बताया जाता है कि आदमपुर गांव निवासी राघवराम ने अपनी बेटी बबिता की शादी कटरा बाजार के सर्वांग पुर निवासी अभिषेक के साथ तय की थी। पांच जून को बारात आनी थी। बेटी के पिता राघवराम के मुताबिक वर पक्ष शादी में भेजे गए डाल पर दो जोड़ी साड़ी व 50 हजार के जेवरात रखे थे।

यह देखकर माथा ठनक गया। जब कोई ससुराल में नाई, धोबी, बढ़ई के लिए साड़ी नहीं ला सकता तो उसकी नीयत कैसी होगी। इससे उन्हें बेटी का जीवन अंधकार दिखा। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी को ऐशो आराम में देखना चाहता था। उसने घर व परिवार देखकर शादी तय की थी। उसे यह सब नहीं मालूम था जबकि, लड़की ने कहा कि सरकारी नौकरी भी नहीं है। ऐसे में वह शादी नहीं कर सकती है। इसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से पंचायत हुई। इसमें दोनों पक्ष ने शादी न करने की सहमति जता दी। बिना विवाह के बाराती वापस लौट गए।

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