20 हजार करोड़ की संपत्ति छोड़ गए थे राजा,30 साल की कानूनी लड़ाई के बाद बेटियों के हक़ में हुआ फैंसला

दोस्तों कई सारी ऐसी क़ानूनी लड़ाई होती है जिसको हर हाल में कोई न कोई लड़ता जरुर है इसी प्रकार से हमारे  देश में महिलाओ को पिता की सम्पति में अधिकार की मांग करने के लिए क़ानून से पहले एक लंबी सामाजिक जंग को जीतना पड़ता है. इसीप्रकार से जब महिलाये सामाजिक रिश्ते को ताक पर रखकर अपने पिता की सम्पति में हिस्से की माग करती है तो विभिन्न प्रकार की क़ानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है इसीप्रकार से एक ऐसा मामला सुनने को आया है कि पिता ने छोड़ी थी 20 हजार करोड़ की सम्पत्ति जिसके बाद 30 सालो तक बेटियों ने लड़ी क़ानूनी लड़ाई बाद में अदालत ने क्या सुनाया अहम फैसला जानने के लिए बने रहे लेख के अंत तक.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुनाया गया, जिसके बाद 30 साल पुराने संपत्ति विवाद को सुलझा लिया गया। मामला किसी छोटी-मोटी संपत्ति का नहीं था, बल्कि फरीदकोट के महाराज की संपत्ति करीब 20 हजार करोड़ रुपये है, जिसके हक के लिए उनकी बेटियां 30 सालो से कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। इसमें कई जगहों पर हीरे, जवाहरात, किले, महल और इमारतें शामिल हैं। अंत में, दोनों बहनों की जीत हुई और उन्हें इस संपत्ति में एक बड़ा हिस्सा देने का फैसला बरकरार रखा गया। सीजेआई यूयू ललित, न्यायमूर्ति एस रविंदर भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कुछ संशोधनों के साथ उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को यह फैसला सुरक्षित रख लिया था।

क्यों था विवाद :-

महारावल खेवाजी ट्रस्ट और महाराजा की बेटियों के बीच यह कानूनी लड़ाई कानूनी इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई में से एक है। कोर्ट ने महाराजा की वसीयत को खत्म करते हुए 33 साल बाद महारावल खेवाजी ट्रस्ट को भंग करने का फैसला भी दिया है। ट्रस्ट के सीईओ जागीर सिंह सरन ने कहा,’अभी तक हमें केवल सुप्रीम कोर्ट का मौखिक फैसला पता चला है, कोई लिखित आदेश नहीं मिला है. जुलाई 2020 में ट्रस्ट ने खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसके बाद 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था और ट्रस्ट की निगरानी की अनुमति दी थी। साल 2013 में चंडीगढ़ जिला अदालत ने दोनों बेटियों अमृत कौर और दीपिंदर कौर के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद मामला हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ट्रस्ट के लोग संपत्ति हड़पने की साजिश रच रहे हैं और फर्जी बातें बता रहे हैं।

कहानी क्या है? :-

वर्ष 1918 में अपने पिता की मृत्यु के बाद, हरिंदर सिंह बराड़ को केवल 3 वर्ष की आयु में महाराजा बनाया गया था। वह इस रियासत के अंतिम महाराजा थे। बराड़ और उनकी पत्नी नरिंदर कौर की तीन बेटियां थीं। अमृत ​​कौर, दीपिंदर कौर और महीपिंदर कौर। उनका एक बेटा भी था जिसका नाम टिक्का हरमोहिंदर सिंह था। महाराज के बेटे की 1981 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद महाराज डिप्रेशन में चले गए। सात-आठ महीने बाद उसकी वसीयत तैयार की गई।

बीमार महाराज की पत्नी और मां भी अंधेरे में थे :-

महाराज की संपत्ति की देखभाल के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया था। इस बात की जानकारी उनकी पत्नी और मां को भी नहीं थी। दीपिंदर कौर और महीपिंदर कौर को इस ट्रस्ट का चेयरपर्सन और वाइस चेयरपर्सन बनाया गया है। वहीं इस वसीयत में यह भी लिखा था कि बड़ी बेटी अमृत कौर ने उसकी मर्जी के खिलाफ शादी की है, इसलिए उसे बेदखल किया जाता है। यह बात तब सामने आई जब 1989 में महाराज की मृत्यु हो गई थी।

बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत :-

महाराज की पुत्री महीपिंदर कौर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका निधन शिमला में हुआ। अमृत ​​कौर ने 1992 में स्थानीय अदालत में मामला दायर किया था। उन्होंने कहा कि हिंदू संयुक्त परिवार होने के कारण संपत्ति पर उनका अधिकार था, जबकि उनके पिता की वसीयत में सारी संपत्ति ट्रस्ट को दे दी गई थी। अमृत ​​कौर ने इस वसीयत पर सवाल उठाए।

कहां-कहां है महाराज की संपत्ति :-

आजादी के बाद महाराज को 20 हजार करोड़ की संपत्ति दी गई। इसमें चल और अचल संपत्ति शामिल है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और हरियाणआ के अलावा चंडीगढ़ में भवन  और जमीनें हैं। फरीदकोट का राजमहल- फरीदकोट का राजमहल 14 एकड़ में है। यह 1885 में बना था। अब इसके एक हिस्से में 150  बेड का चैरिटेबल अस्पताल चल रहा है। किला मुबारक, फरीदकोट- 1775 में इस किले को राजा हमीर सिंह ने बनवाया था। यह 10 एकड़ में है। जो इमारत अब बची है उसका निर्माण 1890 में हुआ था।

नई दिल्ली का फरीदकोट हाउस :-

नई दिल्ली में कॉपरनिकस मार्ग पर एक बड़ा भूमि का टुकड़ा है। केंद्र सरकार ने इसे किराये पर ले रखा है और हर महीन लगभग 17 लाख का किराया देती है। इसकी कीमत लगभग 1200 करोड़ रुपये नौ साल पहले थी। इसके अलावा चंडीगढ़ में मणीमाजरा किला, शिमला का फरीदकोट हाउस महाराजा की संपत्ति में शामिल हैं। 1929 मॉडल रोल्स रॉयस, 1929 मॉजल ग्राहम, 1940 मॉडल बेंडली, जैगुआर, डामलर, पैकार्ड भी हैं जो कि अभी चलतू हालत में हैं। इसके  अलावा 1 हजार करोड़ के हीरे जवाहरात है जो कि मुंबई के स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के पास सुरक्षित हैं।

 

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