लंबाई 18 इंच, उम्र 55 साल नागा बाबा नारायण नंद स्वामी ने दिए हरिद्वार कुंभ में दर्शन

दोस्तों इस धरती पर बहुत से मन्दिर मौजूद है .लेकिन कुछ मंदिर के प्रति लोगो की आस्था और श्रध्दा काफी होती है .इसी प्रकार से हरिदावर देवभूमि के नाम से मशहूर है जहा पर हर पांच  साल बाद यहाँ पर महाकुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है और इसी कुम्भ के दौरान बड़ी संख्या में अद्धभुत और अनोखे संत-बाबा देखने को मिलते हैं।  कोई अपनी अनूठी साधना के लिए तो कोई अपनी अनोखी काठी को लेकर. जिससे लोगो का ध्यान अपनी और आकर्षित करते है क्योकि ये संत बाबा अपनी तपस्या करने के लिए एक ही गुफा में सालो तक रहते हैं. लेकिन महाकुम्भ के अवसर पर ये संत बाबा बड़ी संख्या में आशिर्वाद देने संगम पर एकत्रित होते हैं . एक ऐसे ही खास बाबा है जो हरिदावर में कुम्भ मेले के दौरान पधारे हुए है. जिनकी लम्बाई 18 इंच और उम्र 55 साल बताई  जा रही है तो आइये जानते है विस्तार से बावन भगवान बाबा के बारे में जानने के लिए बने रहे लेख के अंत तक.

हरिद्वार कुंभ में पधारे बावन भगवान! लंबाई 18 इंच, उम्र 55 साल

ऐसे ही एक खास नागा बाबा है नारायण नंद स्वामी. नारायण नंद जूना अखाड़े के नागा सन्यासी हैं. इस नागा सन्यासी की हाइट महज़ 18 इंच है और वजन भी सिर्फ 18 किलो ही है. बाबा नारायण नंद ठीक से सुन भी नहीं पाते हैं बावजूद इसके वह भगवान शिव की आराधना में लीन रहते हैं. हरिद्वार के श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के पास बिरला घाट पुल के किनारे नारायण नंद ने अपना डेरा जमाया हुआ है. जो कोई भी इस राह से गुजरता है, वह नारायण नंद गिरी महाराज के दर्शन करने के लिए जरूर रुकता है.

कुंभ मेले में नागा साधु-संतों के अद्भुत और निराले रूप देखने को मिल रहे हैं. आध्यात्मिक राजधानी के रूप में मान्यता प्राप्त कुंभ नगरी हरिद्वार इस समय वास्तव में धर्म, आस्था, श्रद्धा और अध्यात्म से सराबोर है. संत, नागा संत और अखाड़े, टेंट और अखाड़ों की छावनियों के टीनशेड का रेला लगा हुआ है. कुंभ मेले में नागा साधु-संतों के अद्भुत और निराले रूप देखने को मिल रहे हैं. आध्यात्मिक राजधानी के रूप में मान्यता प्राप्त कुंभ नगरी हरिद्वार इस समय वास्तव में धर्म, आस्था, श्रद्धा और अध्यात्म से सराबोर है. संत, नागा संत और अखाड़े, टेंट और अखाड़ों की छावनियों के टीनशेड का रेला लगा हुआ है.

स्वामी नारायण नंद मूल रूप से झांसी के रहने वाले है और ये हरिद्वार के कुंभ 2010 में जूना अखाड़े में शामिल हुए थे. फिर उन्होंने नागा संन्‍यासी की दीक्षा प्राप्ति की. नागा संन्‍यासी बनने से पहले उनका नाम सत्यनारायण पाठक था. संन्‍यासी दीक्षा लेने के बाद उनका नाम स्वामी नारायण नंद महाराज हो गया और तब से ही वह भगवान शिव की भक्ति में लीन हैं.स्वामी नारायण नंद ने बताया कि, ”हमारा नाम नारायण नंद बावन भगवान है. हम जूनागढ़ के नागा बाबा हैं. सन 2010 में कुंभ लगा था तब हम नागा हो गए थे. मैं झांसी का रहने वाला हूं. अब बलिया जिला में अपने गुरु के पास रहते हैं. हमारे गुरु जी का नाम गंगा नंद दास है और गंगा नंद जी के गुरु का नाम आनंद गिरी है.” उन्होंने आगे बताया कि आनंद गिरी के गुरु का नाम हरि गिरि  है. मेरी उम्र 55 साल है और जन्म हमारा झांसी का है.

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